Saturday, 27 January 2024

 

भाव सिर्फ राम हैं

सारा जग है प्रेरणा
प्रभाव सिर्फ राम है
भाव सूचियाँ बहुत हैं
भाव सिर्फ राम हैं

कामनाएं त्याग
पूण्य काम की तलाश में
राजपाठ त्याग
पूण्य काम की तलाश में
तीर्थ खुद भटक रहे थे
धाम की तलाश में
कि ना तो दाम
ना किसी ही नाम की तलाश में
राम वन गये थे
अपने राम की तलाश में
आप में ही आपका
आप से ही आपका
चुनाव सिर्फ राम हैं
भाव सूचिया बहुत हैं
भाव सिर्फ राम हैं

ढाल में ढले समय की
शस्त्र में ढले सदा
सूर्य थे मगर वो सरल
दीप से जले सदा
ताप में तपे स्वयं ही
स्वर्ण से गले सदा
राम ऐसा पथ है
जिसपे राम ही चले सदा

दुःख में भी अभाव का
अभाव सिर्फ राम हैं
भाव सूचिया बहुत है
भाव सिर्फ राम हैं

ऋण थे जो मनुष्यता के
वो उतारते रहे
जन को तारते रहे
तो मन को मारते रहे
इक भरी सदी का दोष
खुद पर धारते रहे
जानकी तो जीत गई
राम तो हारते रहे

सारे दुःख कहानियाँ है
दुःख की सब कहानियाँ हैं
घाव सिर्फ राम हैं
भाव सूचिया बहुत है
भाव सिर्फ राम है

सब के अपने दुःख थे
सबके सारे दुःख छले गये
वो जो आस दे गये थे
वही सांस ले गये
कि रामराज की ही
आस में दिए जले गये
रामराज आ गया
तो राम ही चले गये

हर घड़ी नया-नया
स्वभाव सिर्फ राम हैं
भाव सूचिया बहुत हैं
भाव सिर्फ राम है

जग की सब पहेलियों का
देके कैसा हल गये
लोग के जो प्रश्न थे
वो शोक में बदल गये
सिद्ध कुछ हुए ना दोष
दोष सारे टल गये
सीता आग में ना जली
राम जल में जल गये
- अमन अक्षर

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